Best Shayari status in hindi for whatsapp and facebook 2020

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Best Shayari status in hindi

टूटे हुवे सपनो और रूठे हुवे अपनों ने आज उदास कर दिया |
वरना लोग हमसे मुस्कराने का राज पुछा करते थे ||

 

मत दे दुआ किसी को अपनी उमर लगने की,
यहाँ ऐसे भी लोग है जो तेरे लिए जिन्दा हैं….!

 

पगली तेर लिये इस दिल ने कभी बुरा नही चाहा,
ये और बात है मुझे साबित करना नहीं आया..!!

 

रुठुंगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगा की ,,
ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी !!

 

दादागिरी तो हम मरने के बाद भी करेंगे ,
लोग पैदल चैलेगे और हम कंधो पर ..!!

…..अगर हम जैसे शरीफो ने दादागिरी
शुरु करदी तो, इन हसिनाओ को कोन संभालेगा !!

 

उस शख्स में बात ही कुछ ऐसी थी
दिल नहीं देते तो जान चली जाती..!

 

होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है ,
इश्क़ कीजिए फिर समझिए जिंदगी क्या चीज़ है ll

 

हुकूमत बाजुओं के ज़ोर पर तो कोई भी कर ले,
जो सबके दिल पे छा जाए उसे इंसान कहते हैं…!!!

 

दिल मे बने रहना ही सच्ची शोहरत है ,,
वरना मशहूर तो कत्ल करके भी हुआ जा सकता है..!!

 

दिखावे की मोहब्बत तो जमाने को हैं हमसे पर…,,
ये दिल तो वहाँ बिकेगा जहाँ ज़ज्बातो की कदर होगी .

 

बेशक , Ishq बड़ी कुत्ती-कमीनी चीज हे पर ,
सही इंसान से हो जाय तो, जिंदगी संवर जाती हे ।।

 

ज़िन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती हे ,,
दूसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं ll

 

मिलने को तो दुनिया मे कई चेहरे मिले ,,
पर तुम सी ‎मोहब्बत हम खुद से भी न कर पाये..!!

 

जाने क्या कशिश है उसकी मदहोंश आँखों में,
नजर अंदाज जितना करो नज़र उस पे ही पड़ती हैl

 

~सँभाल कर रखिए, जरा अपने दिल को जनाब . . . .
~ये टूटते ही नहीँ, चोरी भी बहुत होते है . . . .

 

मिले तो हज़ारों लोग थे ज़िन्दगी में पर,
वह सबसे अलग था जो किस्मत में नहीं था..!!

 

चेहरे अजनबी हो भी जायें तो कोई बात नहीं लेकिन ,
रवैये अजनबी हो जाये तो बड़ी तकलीफ देते हैं ।

 

ज़रा शिद्दत से चाहो तभी होगी आरज़ू पूरी हम वो नहीं जो तुम्हे खैरात में मिल जायेंगे..ll

 

रिश्ते कभी अपने आप नही टूटते अहंकार , अज्ञान और रवैये उन्हें तोड़ देते हे ।।

 

मजबूरियां ओढ़ के निकालता हूँ घर से ,, वर्ना शौक तो अब भी है बारिशों में भीगने का ll

 

आवारगी छोड़ दी तो लोग भूल जायेंगे ,, आवारापन ही सही, कुछ तो पेहचान हे !!

 

हज़ारो मैं मुझे सिर्फ़ एक वो शख्स चाहिये ,,
जो मेरी ग़ैर मौजूदगी मैं, मेरी बुराई ना सुन सके ll

 

उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,,
जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही ll

 

अगर किस्मत आज़माते-आज़माते थक गये हों…
तो कभी ख़ुद को आज़माईये, नतीजे बेहतर होंगें…!!!…

 

जब भी चाहा सिर्फ तुम्हे चाहा..
पर कभी तुम से कुछ नही चाहा..!!

 

दोस्ती और दुश्मनी मजेदार हे ,, बस निभाने का दम होना चाहीए ।

 

कुछ खास जादू नही है मेरे पास,
बस बातें दिल से करता हूँ..!!!!

 

जानता हु तुम सो गई हो, मुझे पढ़ते हुए ,,
मगर में रातभर जागूँगा, तुम्हे लिखते हुए ।

 

कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने,
मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये…!!!

 

अरमां तमाम उम्र के सीने में दफ़न हैं….
हम चलते फिरते लोग मजारों से कम नहीं…..

 

मार ही डाले जो बेमौत ये दुनिया वाले
हम जो जिंदा हैं तो जीने का हुनर रखते हैं

 

कभी झुकने की तमन्ना कभी कड़वा लहजा
अपनी उलझी हुयी आदतों पे रोना आया

 

क्या पता था, दोस्त ऐसे भी दगा दे जाएगा ,
अपने दुश्मन को मेरे घर का पता दे जाएगा…..

 

टूटी टूटी सी हर एक आस लगे ,
ज़िन्दगी अब मुझे राम का वनवास लगे …..

 

‘परिंदे भी नहीं रहते पराये आशियानों में,
हमने जिंदगी गुजारी है किराये के मकानों में।’

 

आईना टूट भी जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन दिल न टूटे ये बिकते नहीं बाजारों में

 

दोस्तों ने हर कदम पे रुसवा किया
तब से मुझे दुश्मनों की दुश्मनी अच्छी लगी

 

हमने इक शाम चराग़ों से सजा रक्खी है
शर्त लोगों ने हवाओं से लगा रक्खी है

 

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये

 

खत पे खत हमने भेजे पर जवाब आता नहीं
कौन सी ऐसी खता हुयी मुझ को याद आता नहीं

 

तेरा मिलना लाख खुशी की बात सही पर तुझसे मिलके ,उदास रहते हैं

 

दिल में अरमान बहुत हैं सजाऊँ कैसे,
तेरी याद बहुत आये ,भुलाऊँ कैसे

 

उजाले में शमा जलाने से क्या फायदा, वक्त गुजरने के बाद पछताने से क्यां फायदा

 

इस जहां में कब किसी का दर्द अपनाते हैं लोग , रुख हवा का देख कर अक्सर बदल जाते हैं लोग

 

सहारा लेना ही पड़ता है मुझको दरिया का मैं इक कतरा हूँ तनहा तो बह नहीं सकता

 

मैं भी उसे खोने का हुनर सीख न पाया
उसको भी मुझे छौड के जाना नहीं आता

 

वो झूद भी बोल रहा था बड़े सलीके से,
मैं एइत्बार ना करता तो क्या क्या करता

 

हादसों की ज़द में हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें , जलजलों के खौफ से क्या घर बनाना छोड़ दें ??

 

सफ़र में मुश्किलें आयें, तो जुर्रत और बढती है ,
कोई जब रास्ता रोके , तो हिम्मत और बढती है….

 

अँधेरा कब्र का इतने में ही खुश है , की जलता है कोई ऊपर दिया तो..

 

ले के उस पार ना जायेगी जुदा राह कोई ,
भीड़ के साथ ही दलदल में उतरना होगा…..

 

वो अपने आप को बेहतर शुमार करता है , अजीब शख्स है , अपना ही शिकार करता है….

 

जवानी जाती रही और हमें पता भी ना चला ,
उसी को ढूंढ रहे हैं , कमर झुकाए हुए,,,,

 

जिंदगी में खूब कमाया , क्या हीरे क्या मोती ,
क्या करूँ मगर कफ़न में जेबें नहीं होती……

 

अचानक चौंक उठा हूँ , जिस दम पड़ी है आँख ,
आये तुम आज भूली हुयी याद की तरह……

 

आज आगोश में था और कोई ,
देर तक हम तुझे न भुला सके …..

 

ना समझने की ये बातें हैं, ना समझाने की,
ज़िन्दगी उचटती हुयी नींद है दीवाने की….

 

अपने ही साए में था, मैं शायद छुपा हुआ, जब खुद ही हट गया, तो कही रास्ता मिला…..

 

जनम मरण का साथ था जिनका, उन्हें भी हमसे बैर,
वापिस ले चल अब तो हमे, हो गयी जग की सैर….

 

मेरे गम ने होश उनके भी खो दिए, वो समझाते-सम्झाते खुद ही रो दिए…..

 

साहिल से सकूँ से किसे इनकार है लेकिन, तूफ़ान से लड़ने में मज़ा ही कुछ और है…..

 

ज़िन्दगी से जो भी मिले , सीने से लगा लो,
गम को सिक्के की तरह उछाला नहीं करते……

 

दिल मुझे तितली का टूटा हुआ पर लगता है,
अब तेरा नाम भी लिखते हुए डर लगता है…..

 

ना समझने की ये बातें हैं, ना समझाने की,
ज़िन्दगी उचटी हुयी नींद है दीवाने की……

 

 

मुझ में तुझ में फर्क नहीं,मुझ में तुझ में फर्क है ये ,
तू दुनिया पर हँसता है,दुनिया मुझ पर हंसती है…..

 

मैंने कहा कभी सपनो में भी शक्ल ना मुझको दिखाई, उसने कहा, मुझ बिन भला तुझको नींद ही कैसे आई?

 

दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद है,
देखना है , फेंकता है मुझ पर पहला तीर कौन……

 

कांच की गुडिया ताक में कब तक सजाये रखेंगे,
आज नहीं तो कल टूटेगा, जिसका नाम खिलौना है…..

 

जाती है धूप उजले परों को समेट के,
ज़ख्मों को अब गिनूंगा मैं बिस्तर पे लेट के…..

 

नन्हे बच्चों ने छू लिया चाँद को,
बूढ़े बाबा कहानी ही सुनाते रह गए…..

 

दुश्मनी का सफ़र एक कदम दो कदम, तुम भी थक जाओगे, हम भी थक जाएंगे…..

 

मंज़ूर नहीं किसी को ख़ाक में मिलना,
आंसू भी लरज़ता हुआ आँख से गिरता है…..

 

खुद को पढता हूँ, फिर छोड़ देता हूँ,
रोज़ ज़िन्दगी का एक हर्फ़ मोड़ देता हूँ…

 

काश बनाने वाले ने दिल कांच के बनाये होते,
तोड़ने वाले के हाथ में ज़ख्म तो आये होते…..

 

कोई इसके साथ है , कोई उसके साथ है ,
देखना ये चाहिए , मैदान किसके हाथ है…..

 

रस्ते को भी दे दोष , आँखें भी कर लाल,
चप्पल में जो कील है , पहले उसे निकाल…..

 

मेहरबान होकर बुला लो मुझे जिस वक़्त, मैं गया वक़्त नहीं की फिर आ भी ना सकूँ…..

 

कौन कहता ही की छेद आसमां में हो नहीं सकता, इक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों…….

 

दिल के फफोले जल उठे , सीने के दाग से, इस घर को आग लग गयी, घर के चिराग से…..

 

कही से सुना था उसने, की जीवन काँटों भरा होता है,तब से सदा वो दूसरों के जीवन में कांटे बोता है…..

 

मार ही डाले जो बेमौत, ये दुनिया वाले हम जो जिन्दा हैं तो जीने का हुनर रखते हैं

 

उलझा दिया दीमक ने ये कैसे शरारत की कागज तो नहीं चाटा ,तहरीर मिटा दी है

 

ठहरी है तो इक चेहरे पे ठहरी रही है बरसों,भटकी है तो फिर आँख भटकती ही रही है…….

 

प्यार,,,,प्यार भी कभी पूरा होता है?इसका तो पहला अक्षर ही अधूरा होता है.

 

रंजिश ही सही , दिल को दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे , छोड़ जाने के लिए आ…..

 

प्यार अपनों का मिटा देता है ,इंसान का वजूद , जिंदा रहना है तो गैरों की नज़र में रहिये…….

 

गम बिछड़ने का नहीं करते खानाबदोश , वो तो वीराने बसाने का हुनर जानते हैं…….

 

मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दी, सिर्फ एक कागज़ पर लफ्जे माँ रहने दिया …..

 

मुझको थकने नहीं देता , ये ज़रुरत का पहाड़.मेरे बच्चे मुझे बूढा होने नहीं देते……

 

किसी को मकां मिला,किसी के हिस्से में दुकां आई, मैं घर में सबसे छोटा था,मेरे हिस्से में माँ आई…..

 

मैंने उसका हाथ थमा था राह दिखने को, अब ज़माने को दर्द हुआ तो मैं क्या करूँ ?

 

ज़िन्दगी के मायने तो याद तुमको रह जायेंगे , अपनी कामयाबी में कुछ कमी भी रहने दो….

 

अकेले बैठोगे, तो मसले जकड लेंगे., ज़रा सा वक़्त सही , दोस्तों के नाम करो…..

 

जो चीज़ उन्होंने ख़त में लिखी थी, नहीं मिली. ख़त हमको मिल गया है, तस्सली नहीं मिली…..

 

सर पर चढ़कर बोल रहे हैं, पौधे जैसे लोग, पेड़ बने खामोश खड़े हैं, कैसे-कैसे लोग…..

 

उसको रुखसत तो किया था, मुझे मालून न था. सारा घर ले गया, छोड़ के जाने वाला…..

 

नाकामियों ने और भी सरकश बना दिया, इतने हुए जलील, की खुददार हो गए…

 

मौत आई तो क्या मैं मर जाऊँगा? मैं तो इक दरिया हूँ, जो समंदर में मिल जाऊँगा.

 

उसके होंठों पे कभी बददुआ नहीं होती , बस इक माँ है जो मुझसे कभी खफा नहीं होती.

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